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नवाजुद्दीन सिद्दीकी की जीवनी सुनकर आपके आँखों में आंसू आ जायेंगे | Nawazuddin Siddiqui Biography Success Story in Hindi.

'बेटा कचरे के ढेर की भी जगह बदलती है फिर भी तू तो इंसान है तेरा भी वक्त आएगा' | यह एक लेटर पर लिखी हुई वह लाइन है जो एक मां ने अपने बेटे के लिए उस वक्त लिखी थी जब उसका बेटा मुंबई में 12 साल से लगातार स्ट्रगल कर रहा था|

Nawazuddin Siddiqui Biography Success Story in Hindi

Nawazuddin Siddiqui Biography Success Story in Hindi

कुछ साल बाद लेटर पर लिखे हुए वह लाइनें  सच साबित हुई| वक्त बदला और वह इंसान स्टार बन गया| उस महान शख्सियत का नाम है "नवाज़ुद्दीन सिद्धकी" | जो आज करोड़ों दिलों पर राज करते हैं | 

जिंदगी जब थप्पड़ मारना शुरू करती है ना तो अच्छे अच्छे खिलाड़ी मैदान छोड़कर भाग जाते हैं, लेकिन यह बंदा किसी और ही मिट्टी का बना हुआ था जो लगातार 12 साल जिंदगी के थप्पड़ो को लगातार सहता रहा और एक कठोर हीरा बंद है जिसकी चमक आज सबको दिखाई दे रही है|

Nawazuddin siddiqui struggle story in hindi

दोस्तों इन 12 सालों में "नवाजुद्दीन सिद्दीकी" ने कैसे स्ट्रगल किया? और कैसे इतने बड़े सुपरस्टार बन गए? सब कुछ मैं आपको इस पोस्ट में बताने जा रहा हूं और मेरा यकीन करना अगर आपने इस पोस्ट को पूरा पढ़ें तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता|

What is Siddiqui caste and born date? 

नवाजुद्दीन सिद्दीकी का "जन्म 1974" में "उत्तर प्रदेश राज्य के मुजफ्फरनगर जिले" के एक छोटे से गांव में हुआ था| उनका जन्म एक "मुस्लिम परिवार" में हुआ था जो जमींदार थे मतलब किसान थे| यह टोटल 8 बहन - भाई हैं| जिसमें से सबसे बड़े हैं "नवाजुद्दीन सिद्दीकी"| 

How much is Nawazuddin Siddiqui worth?

ट्वेल्थ (12th) क्लास की पढ़ाई गांव के एक स्कूल से कंप्लीट की| अब हायर एजुकेशन के लिए गांव में कोई कॉलेज तो था नहीं, इसलिए बाहर जाना पड़ता था| और कोई ऑप्शन भी नहीं था| या तो गांव में रहकर खेती कर लो या फिर बाहर जा कर आगे की पढ़ाई कंप्लीट कर लो|

Nawazuddin siddiqui educational qualification

नमाज साहब कहते हैं कि उनके गांव में लोग सिर्फ तीन चीजों को ही जानते हैं| गेहूं, गन्ना और कन उन्होंने हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से साइंस ग्रैजुएट डिग्री हासिल की उसके बाद गुजरात के वडोदरा में as a कैमिस्ट उन्होंने काम किया|

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लेकिन मुझे मजा नहीं आ रहा था मुझे लग रहा था कि यार जिंदगी सिर्फ कट रही है और मुझे जिंदगी काटने नहीं है इसे जीना है फिर ऐसे ही एक जो उन्होंने एक नाटक देखा और वहां से उन्हें लगा कि यह काम मेरे लिए बेस्ट रहेगा क्यों न इसी में अपना कैरियर बनाया जाए| उन्होंने नौकरी छोड़ दी और और तुरंत आ गए दिल्ली|

उन्होंने सपना तो देख लिया था की एक्टिंग में ही अब अपना कैरियर बनाना है लेकिन जब वो दिल्ली आए तो कैसे क्या करना है उन्हें कुछ भी नहीं पता था| काफी मशक्कत के बाद उन्हें एक थिएटर ग्रुप मिला लेकिन उसके उन्हें पैसे नहीं मिलते थे लेकिन फिर भी वहां पर काम करते थे क्योंकि उन्हें सीखना था|

Nawazuddin siddiqui national school of drama

कुछ दिनों बाद उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में एडमिशन ले लिया और 3 साल तक एक्टिंग सीखे| इस बीच दिल्ली में सर्वाईब करने करने के लिए उन्होंने नोएडा में एक वाच मैन की नौकरी करना शुरू कर दिया था और 3 साल तक सर्वाईब करते रहे| 

लेकिन उन्हें ये समझ में आ गया था की उनका सपना यहां पूरा होने वाला नहीं है| उसके बाद सन् 2000 में वह आ गए मुंबई बिल्कुल अकेले, अगर साथ में था तो बस एक सपना| दोस्तों और रिश्तेदारों ने उन्हें पहले ही बोल दिया था कि यह तेरे बस की बात नहीं है, तू कहां से अपने आप को हीरो समझता है|

Nawazuddin siddiqui audition

लेकिन क्या फर्क पड़ता है दुनिया चाहे कुछ भी कहे, लेकिन वह आत्मविश्वास उनके अंदर था| उसने नवाज साहब को वह ऊंचाई तक पहुंचा दिया| मुंबई में जाकर उन्होंने ऑडिशन देना शुरू कर दिया, नवाज साहब ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वो ऑडिशन देने जाते थे तो उन्हें हर बार एक ही बात सुनने को मिलती थी कि पहले हुलिया देख अपना और ऐसा बोल कर उन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता था| 

वह अडिशन देते गए और लोग उन्हें रिजेक्ट करते गए| एक वक्त ऐसा भी आया जो पैसे लेकर आए थे वह अब खत्म होने लगे थे| उनके पास रूम के पैसे देने तक का पैसे नहीं थे| लेकिन जो उनका पार्टनर था| उससे उन्होंने कहा कि मेरे पास रेंट के लिए पैसे नहीं है अगर आप हमें यहां रहने दो तो मैं आपके लिए खाना बना दूंगा|

कुछ दिन तक वे वह पर रुके और वहां से भी उन्हें निकाल दिया गया| अब उनके पास ना रहने का ठिकाना था, ना सोने का और रही बात खाने की तो कई बार उन्हें भूखा सोना पड़ता था| यह वो दौर था जब नवाजुद्दीन सिद्दीकी के पास कुछ भी नहीं था| बस आंखों में एक सपना था जिसे अपने टैलेंट के दम पर पूरा करना था|

Nawazuddin siddiqui first movie

लेकिन उन्हें अपने टैलेंट को इस दुनिया को दिखाने के लिए मौका ही नहीं मिलता था| हालांकि कुछ फिल्मों में उन्हें छोटे-मोटे किरदार दिए गए जैसे कि मुन्नाभाई एमबीबीएस में चोर का किरदार मिला| ऐसे सरफरोज और कई ऐसी मूवीज में उन्हें छोटे-मोटे रोल मिलते रहे| लेकिन एक सुपरस्टार बनने के लिए का सपना अभी बहुत दूर दिखाई दे रहा था| 

उसके बाद 2007 में ब्लैक फ्राईडे मूवी में एक पावरफुल किरदार मिला| लेकिन उस फिल्म कि रिलीज अटक गई| नवाजुद्दीन सिद्दीकी इंतजार करते रहे कि कब ये फिल्म रिलीज होगी और कब लोगों की नजरें इस चहरे पर पड़ेगी| दोस्तों उसके बाद उन्हें कई फिल्में मिले, लेकिन वह पहचान नहीं बन पा रही थी जिसका सपना नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने देखा था|

Why Nawazuddin Siddiqui is famous?

फाइनली 2012 में उन्हें मिली अनुराग कश्यप की फिल्म "गैंग्स ऑफ वासेपुर"| और इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपने 12 साल के एक्सपीरियंस को निचोड़ दिया| जब लोगों ने इस मूवी को देखा तो उनके जुबां पर एक ही सवाल था, कि यार ये बंदा कौन है? कहां से आया है? जिसने पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री को हिला कर रख दिया| 

लोगों की जो सोच बनी हुई थी कि हीरो बनने के लिए एक अच्छा लुक और पर्सनैलिटी चाहिए होती है, उस भ्रम को नवाज साहब ने तोड़ दिया| उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आप जानते हैं नवाज साहब आज किस मुकाम पर हैं| 

N,awazuddin siddiqui motivational dialogue

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपने एक इंटरव्यू ने कहा है कि जो भी सपना देखो उसे पूरा करने के लिए अपनी पूरी जान लगा दो| फिर चाहे उसे 10 साल लगे, 20 साल लगे या फिर 30 साल| उन्हीं के एक फिल्म का डायलॉग है, "जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं"| 

इसलिए तकलीफे चाहे कितनी क्यों न आए कभी हार नहीं माननी है, बस लगे रहना है| एक जिद के साथ कि साला कुछ भी हो जाए, यह तो मैं करके रहूंगा| फिर देखना कैसे सफलता के पीछे दौड़ते दौड़ते 1 दिन सफलता आपके पीछे दौड़ने लगती है| 

इसलिए आप कोशिश करते रहो आज नहीं तो और कभी करेंगे लोग गौर कभी रुकना मत बस चलते रहना आएगा तेरा दूर कभी|

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